sarvada anand me raho

सर्वदा आनंद मे रहो 

मनुष्य को सर्वदा प्रसन्न व आनन्द मे रहना चाहिये। परन्तु मनुष्य काम क्रोध लोभ मोह के चककर मे हमेशा फसा रहता है। और दुःखी रहता है मनुष्य के जीवन की सबसे ज्यादा जरुरी चीजे प्रकृति मुफ्त मे देता है। 
.सांस लेने के लिये हवा (ऑक्सीजन ) पीने के लिये जल (पानी ) खाने के लिए फल इत्या दि।

 इसके साथ मिटटी, पेड़- पौधे, पर्वत, जानवर  तथा कई प्रकार के रासयनिक चीजे  आदि। मनुष्य सबसे ज्यादा दिखावटी करने के कारण दुखी रहता है। अपना भविस्य सवारने के चक्कर वर्तमान ख़राब कर देता है।

दुसरो को प्रताड़ित करना सोसण करना उसकी दिन चर्या  बन जाती है। ज्यादा संग्रह के चक्कर भव  सागर में फसे रह जाते है।

यद्यपि सर्वदा आनंद से विमुख रह जाते है। 

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